नेत्रदान कैसे करे? कौन कर सकता है नेत्रदान पूरी जानकारी हिंदी में : eye donation in hindi :
एक तरफ लाखो लोग हर साल कार्निया की खराबी के कारण अंधत्व का शिकार हो जाते है वही दूसरी तरफ जागरूकता के आभाव के करना नेत्र दान नही किया जाता और दाह संस्कार में नष्ट हो जाता है। मृत्यु के बाद नेत्र दान कराने की सबसे बड़ी जिम्मेदारी परिजनों की होती है क्योंकि मृत शरीर पर उन्ही का अधिकार होता है। कई बार यह भी देखा गया है कि नेत्रदान का फॉर्म भरने वाले की मौत के बाद परिजन ही नेत्रदान नहीं करने देते है। हर साल देश में 1 लाख से अधिक कार्निया की ज़रूरत होती है जबकि केवल 16 हजार के आसपास ही मिल पाते है। demand और supply के बीच इतना बड़ा गैप का कारण है लोगो में जागरूकता का आभाव. आज हम आपको इस पोस्ट में यही जानकारी देने वाले है कि नेत्रदान कैसे करे? कौन कर सकता है नेत्रदान आदि ।

नेत्रदान कैसे करे? कौन कर सकता है नेत्रदान


कैरोटोप्लास्टी

दान में मिले कॉर्निया का इस्तेमाल तभी हो पाता है जब वह स्वच्छ और स्वस्थ हो आंखों में खुजली व एवं एलर्जी होने के कारण कॉर्निया का आकार बदल जाता है और चश्मे में सिलेंड्रिकल नंबर बढ़ जाता है. इस बीमारी को केरेटोकोनस (Keratoconus) कहते हैं यह 10 से 20 वर्ष की आयु में तेजी से बढ़ती है.

कॉर्निया आधा मिलीमीटर मोटी परत होती है जिसके पीछे एक-एक सेल वाली पतली परत होती है यह सेल कॉर्निया को पारदर्शी बनाए रखते हैं किसी बीमारी की वजह से अथवा मोतियाबिंद के अधिक पक जाने के बाद हुए ऑपरेशन के बाद इन सेल्स की संख्या में कमी आ जाती है ऐसी स्थिति में अत्यंत आधुनिक cornea transplant technique के जरिए केवल cells वाली परत को ही ट्रांसप्लांट किया जाता है इस तरह की सर्जरी को एंडोथेलियम कैरोटोप्लास्टी कहा जाता है इस प्रकार मरीज का ऊपरी कॉर्निया काम में आ जाता है और मरीज को सतह पर टांके नहीं डालना पड़ता है .

सबसे पहले बात करते है कार्निया क्या है?

कार्निया आँख की सतह पर एक पारदर्शी लेयर होती है. जैसे किसी घडी में सामने सुरक्षा के लिए कांच लगा होता है ठीक उसी तरह आँखों में कार्निया लेयर होती है जो आँख पर पड़ने वाली light को retina तक जाने देती है जिससे हमें वस्तुऐ दिखाई देती है। यह कार्निया किसी कारण से धुंधला हो जाती है तो रेटिना तक light काम मात्रा में पहुचने लगती है जिससे दिखाई काम देने लगता है। इसे कार्निया blindness भी कहा जाता है ।

नेत्रदान कैसे करे

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    क्यों ख़राब होता है कार्निया? (causes of damage of cornea)

    कार्निया के ख़राब होने का कारण एक नहीं कई हो सकता है,
    जैसे :
    1 किसी एक्सीडेंट की वजह से,
    2 कुपोषण की वजह से,
    3 आंख में छाले हो जाने से,
    4 संक्रमण से,
    5 chemical में जल जाने से,
    6 आग में झुलस जाने से,
    7 आँखों की सर्जरी के बाद ठीक से देखभाल न करने पर.

    कैसे किया जाता है नेत्रदान

    नेत्रदान करने के लिए मृतक के परिजनों की स्वीकृति जरूरी होती है यदि अस्पताल में मृत्यु हुई हो तो आसानी से नेत्र दान कराया जा सकता है अथवा इसके लिए नेत्रदान केंद्रों में संपर्क किया जा सकता है आई बैंक (eye bank) की टीम को घर पर पहुंचने में कुछ समय लग सकता है इसलिए मृत्यु के बाद जितनी जल्दी हो सके आई बैंक से संपर्क करना ठीक होता है कॉर्निया निकालने की प्रक्रिया केवल 15 मिनट में ही संपन्न हो जाती है इसी के साथ मृतक के रक्त का नमूना भी ले लिया जाता है ।

    कौन कर सकता है नेत्रदान?

    लोगों में यह भ्रम है कि नेत्रदान में पूरी आंख निकाल ली जाती है जबकि ऐसा नहीं है मृतक के शरीर से केवल कार्निया ही निकाला जाता है इस जिन लोगों की नजर कमजोर है वह भी नेत्रदान कर सकते हैं क्योंकि कई बार नजर कमजोर होने के कई कारण होते हैं. अन्य कारणों से नजर खराब होती है लेकिन कार्निया स्वच्छ और साफ बना रहता है ऐसे में मृतक के शरीर से कॉर्निया निकालकर जरूरतमंद मरीज को लगाया जा सकता है, मृतक के शरीर से जितनी जल्दी हो सके कॉर्निया निकाल लिया जाना चाहिए इसकी समय सीमा 6 घंटे तक की गई है जबकि इससे पहले शव से कॉर्निया निकाल ले तो उसे प्रत्यारोपित करने पर अच्छे नतीजे आते हैं जो बरसों से चश्मा वापरते हैं, डायबिटिक हैं अथवा कैटरेक्ट सर्जरी करा चुके हैं वह भी नेत्रदान कर सकते हैं अगर मृतक ने नेत्रदान का फॉर्म ना भी भरा हो तब भी मृतक के परिजन नेत्रदान का फैसला कर सकते हैं.

    नेत्रदान महादान

    कॉर्निया निकालने से पहले क्या करें?

    जितनी देर कॉर्निया निकालने में होगी उतनी ही उसमें खराबी आती जाएगी इसलिए मृतक की पलकों पर भीगी हुई रुई का फाहा निचोड़ कर रख दें इससे पर्याप्त नमी बनी रहेगी और कॉर्निया नहीं सूखेगा

    छत के पंखों को बंद कर दें ताकि रुई के फाहे पर आवश्यक अनावश्यक हवा ना

    लगे मृतक के सिर के नीचे दो तकिया लगा दें ताकि रक्त इकट्ठा ना हो प्राप्त कॉर्निया को 14 दिनों के अंदर ही किसी जरूरतमंद मरीज को लगाना जरूरी होता है

    यह अयोग्य है नेत्रदान के लिए

    जो मरीज एड्स के कारण मर जाते हैं अथवा हैपटाइटिस रेबीज या सेप्टीसीमिया के कारण मर जाते हैं उनके कॉर्निया को दान के रूप में स्वीकार नहीं किया जाता है मोटर एक्सीडेंट के मौके पर भी कई बार आंखों में आई भारी क्षति के कारण कॉर्निया खराब हो जाता है इसे भी नहीं लिया जाता ।
    ल्यूकेमिया, टेटनस, मेनिनजाइटिस, हैजा, और एन्सेफलाइटिस शामिल हैं, जिसके कारण cornea का दान स्वीकार नहीं किया जाता.

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    कॉर्निया के शॉर्टेज के क्या कारण है

    ट्रेंड टेक्नीशियन की संख्या हमारे देश में काफी कम है इसी के साथ Cornea surgen, eye bank manager अत्याधुनिक कार्य कलेक्शन सेंटर तथा कॉर्निया को अस्पताल तक पहुंचाने की सुविधाओं में भी भारी कमी है, एक सर्वेक्षण के मुताबिक संकलित किए गए corneas में से आधे से अधिक प्रत्यारोपित करने से पहले ही खराब हो जाते हैं ।

    क्या होता है नेत्रदान के बाद

    नेत्र दाता के परिवार को आई बैंक की ओर से एक प्रशंसा प्रमाण पत्र दिया जाता है.

    कॉर्निया आई बैंक सेंटर में लाई जाती है तथा प्रशिक्षित स्टाफ इसका मूल्यांकन करता है.

    टेस्ट करने के बाद रिपोर्ट कॉर्नियल सर्जन के पास भेज दी जाती है

    वेटिंग लिस्ट का अध्ययन करने के बाद कॉर्निया प्रत्यारोपण का इंतजार कर रहे मरीजों में से उपयुक्त मरीज को बुलाया जाता है कॉर्निया प्रत्यारोपण के बाद मरीज को फॉलो वर्क के लिए भी बुलाया जाता है

    सही तरीके से हो प्रत्यारोपण

    अगर पूरा कॉर्निया बदला जाए तो मरीज को 16 बारीक-बारीक टांके लगाना पड़ता है,

    जिन मरीजों को पूरे टांके डालने पड़ते हैं उन्हें टांको की देखभाल करने, वहां रिजेक्शन की जांच कराने के लिए नियमित रूप से नेत्र रोग विशेषज्ञ के पास जाना आना होता है,

    दान में मिले कॉर्निया का सही तरीके से प्रत्यारोपण करने पर ही उसकी सफलता निर्भर है.

    हर साल देश में 1 लाख से अधिक कार्निया की ज़रूरत होती है जबकि केवल 16 हजार के आसपास ही मिल पाते है। demand और supply के बीच इतना बड़ा गैप का कारण है लोगो में जागरूकता का आभाव. इस पोस्ट / आर्टिकल को आप जितना शेयर कर सकते है शेयर करे, इससे लोगो मे जागरूकता बढ़ेगी और नेत्रहीन भी इस खूबसूरत दुनिया देख पाएंगे.

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