टीचर हुए चीटर और पढ़ाई हो गयी फटीचर

KBC में 7 करोड़ जीतने का दावा करने वाली ट्यूशन-टीचर नहीं दे पाईं तीसरी कक्षा के सवाल का जवाब

महाराष्ट्र के कल्याण क्षेत्र में रहने वाली इस प्रतिभागी का नाम अश्विनी भोसले था. जब उनके बारे में अमिताभ बच्चन ने केबीसी टीम की ओर से दिखाए गए वीडियो दिखाया तो उन्हें ये कहते हुए सुना गया कि वो केबीसी से सात करोड़ रुपये जीत लेंगी. उन्होंने केबीसी में दावा किया कि वो सात करोड़ जीत लेंगी.

यही नहीं जब अमिताभ ने उनसे पूछा कि आप बच्चों को क्या पढ़ाती हैं कि तो उन्होंने बताया कि वो सभी विषयों का ट्यूशन देती हैं. पर चौंकाने बात ये कि उन्होंने खेल के शुरुआत में एक दूसरी या तीसरी कक्षा में पूछे जाने वाले सवाल का सही जवाब नहीं दे पाईं. उन्होंने सवाल के जवाब के लिए लाइफलाइन का इस्तेमाल किया. बाद में ऑडिएंस पोल से वो सवाल का जवाब देने में सफल हुईं.

ये था सवाल- इनमें से किसका मान सबसे अधिक है?

a. 100-1 b. 200-111 c. 300-222 d. 400-333

एक केंद्रीय विद्यालय की शिक्ष‌िका के अनुसार आमतौर पर इस स्तर का जोड़-घटना दूसरी कक्षा तक सिखा दिया जाता है. उनके अनुसार सरकारी शिक्षा में पहली कक्षा आमतौर पर 99 तक के जोड़-घटानों पर ध्यान दिया जाता है.

हालांकि अब बच्चे पहले से काफी तैयार होकर आते हैं. वे ये पहले सीखे होते हैं. इसके बाद दूसरी कक्षा में 999 तक जोड़-घटाने सिखाए जाते हैं. लेकिन अगर कोई छात्र-छात्रा तीसरी कक्षा में आने के बाद भी यह सवाल हल नहीं कर पाता तो उसे कमजोर माना जाता है.

जवाब: 100—1

ऐसे ही केबीसी के एक एपिसोड में ग्रेटर नोएडा के एक महँगे कांवेंट स्कुल की गणित की टीचर दीपिका शर्मा हॉट सीट पर पहुंचीं। उनसे अमिताभ बच्चन ने एक आसान सा सवाल पूछा जिसमें उन्होंने पूछा था कि…

10 हजार पैसे में कितने रुपये होंगे ?

गणित की टीचर होने के नाते उन्हें इस सवाल का जवाब जरूर पता होना चाहिए था लेकिन आश्चर्य की बात है कि वो इस सवाल के जवाब में बगलें झांकती नजर आयी और उन्हें इस प्राइमरी स्तर के प्रश्न का जवाब देने के लिए लाइफलाइन तक का इस्तेमाल करना पड़ा। ऑडियंस पोल की मदद से टीचर दीपिका शर्मा ने इस सवाल का सही जवाब देकर तीन हजार रुपये जीते।

वहीं दूसरी ओर इस हाई फाई टीचर से पहले हॉट सीट पर पहुंचे एक कम पढ़े लिखे एवं पेशे से बिजली मिस्त्री रनजीत कुमार ने सभी सवालों का एकदम सही जवाब देते हुए 25 लाख रुपये जीत लिए।

ये उदाहरण इस बात का जीता जागता सबूत है कि शिक्षा का स्तर दिनों दिन कितना गिरता जा रहा है। स्कूल में बच्चों को गणित पढ़ाने वाली टीचर को ये नहीं पता है कि पैसे को रुपये में कन्वर्ट कैसे किया जाता है। ऐसे में बच्चों से क्या उम्मीद की जा सकती है।

शो के दौरान ही ये भी बताया गया कि इन टीचर महोदया को टिक टोक वीडियो बनाने का इतना शौक है कि ये 250 से ज्यादा टिक टोक वीडियो बना चुकी हैं और टिक टोक क्वीन के नाम से मशहूर हैं।

तो ऐसे हैं नए जमाने के ये टीचर जो टीचर कम चीटर ज्यादा हैं। इनको चीटर कहना इसलिए भी जायज है क्योंकि ये टिकटोक, फेसबुक, इंस्टाग्राम, ट्विटर या सेल्फी लेने में ही ज्यादा बिजी रहते है और बच्चों के भविष्य और अभिभावकों की मेहनत की कमाई दोनों के साथ धोखा या चीटिंग करते हैं।

निजी स्कूलों की फीस में हो रही बेतहाशा बृद्धि से एक ओर जहां हर अभिभावक त्रस्त हैं वहीं दूसरी ओर टीचर के रूप में लगभग हर स्कूल में मौजूद ये चीटर जिन्हें बच्चों के भविष्य से ज्यादा अपना मनोरंजन प्रिय है।

गौरतलब है कि टीचर बनने के लिए बीएड की डिग्री ही जरूरी होती है जो आजकल लाइन से खुले सेल्फ फाइनेंस कॉलेजों से पैसे देकर बिना रेगुलर कोर्स अटेंड किये ही बड़ी आसानी से उपलब्ध हो जा रही है।

यहाँ तक की उपस्थिति से लेकर एसाइनमेन्ट आदि तक भी पैसे देकर आजकल बड़ी आसानी से मैनेज हो जाता है। और इस तरह से बिना ट्रेनिंग किये ही अधकचरा ज्ञान लिए कोई भी अनुभवहीन व्यक्ति बड़ी सरलतापूर्वक बीएड की डिग्री लेकर किसी भी स्कूल में टीचर बन जाता है और बच्चों के भविष्य से खिलवाड करता है।

स्कूलों के लिए तो एक टीचर की नियुक्ति हेतु सिर्फ बीएड की डिग्री होना ही प्रयाप्त है। बाकी आजकल गूगल और तमाम ऐसे एप भी उपप्लब्ध है जिनकी मदद से कोई अज्ञानी और अनुभवहीन भी बड़ी आसानी से टीचिंग के पेशे से जुड़े रहते हैं और उनकी असलियत किसी के सामने नहीं आने पाती है।

लेकिन ऐसे रँगे सियार जैसे शिक्षकों की पोल तब खुलती है जब सार्वजनिक रूप से ये किसी आसान से सवाल का जवाब नहीं दे पाते या दो लाइन का आवेदन तक नहीं लिख पाते। ऐसे टिकटोक वाले टाइम पास फर्जी शिक्षकों के कारण ही दिनोंदिन शिक्षा का स्तर गिरता जा रहा है जो हमारी आने वाली पीढ़ी के लिए बहुत नुकसानदेह है।

error: Content is protected !!